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बेटी बनना चाहती थी IAS लेकिन गांव वालों ने बनाया सरपंच, ऐसी क्या खासियत थी इस लड़की में

ग्रामीणों ने निशा की काबिलियत को देखकर गांव की सरपंच बना दिया। इतना ही नहीं निशा सहारण नाथूसरी चौपटा खंड में महिलाओं में सबसे छोटी उम्र की सरपंच बनी है।

बेटी बनना चाहती थी IAS लेकिन गांव वालों ने बनाया सरपंच, ऐसी क्या खासियत थी इस लड़की में
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सिरसा जिले के छोटे से गांव राजपुरा साहनी में 21 वर्षीय निशा सरपंच बनी है।निशा सहारन नाथूसरी चौपटा में महिलाओं में सबसे कम उम्र की सरपंच बनी है। जो आजकल सुर्खियों में छाई हुई है हर कोई गांव की इस बेटी की तारीफ करता हुआ नजर आ रहा है।

राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के सिरसा जिले के छोटे से गांव राजपुरा साहनी में ग्रामीणों ने गांव की बेटी निशा सहारण को सरपंच पद की कमान सौंपी है। 21 वर्षीय निशा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है और यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनना चाहती है। इसी दौरान ग्रामीणों ने निशा की काबिलियत को देखकर गांव की सरपंच बना दिया। इतना ही नहीं निशा सहारण नाथूसरी चौपटा खंड में महिलाओं में सबसे छोटी उम्र की सरपंच बनी है।

निशा सहारण के सरपंच बनने की कहानी रोचक

गांव राजपुरा साहनी में इस बार सरपंच का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया। इस दौरान दो महिलाओं ने नामांकन किया। निशा सहारण के रिश्ते में लगने वाली उसकी भाभी सुमन ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी तरफ निशा सहारण ने भी गांव के विकास करवाने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। लेकिन शुरू से ही ग्रामीणों ने निशा सहारण को सरपंच बनाने का मन बना लिया। तब ग्रामीणों के कहने पर निशा के रिश्ते में लगने वाली भाभी सुमन ने भी अपना समर्थन निशा सहारण को देकर चुनाव प्रक्रिया में निशा का सहयोग दिया और औपचारिकता मात्र चुनाव में निशा को ही जीत दिलवाकर भाभी ने ननद के प्रति अपना फर्ज निभाया।

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