महंगा डीजल भरवाने की जरूरत नहीं, न्यू हॉलैंड ले आया गोबर पर चलने वाला ट्रैक्टर, डीजल वर्जन जितना होगा पावरफुल

आज के समय में किसान के लिए खेती करना बहुत महंगा हो गया है। ट्रैक्टर के पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों के कारण किसान खेती की तरफ कम रुचि ले रहे हैं। किसानों की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए न्यू हॉलैंड कंपनी ने अपना एक गोबर पर चलने वाला ट्रैक्टर तैयार किया है।, इस ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी का यह दावा है कि गोबर पर चलने वाला के ट्रैक्टर डीजल वर्जन जितना ही दमदार और पावरफुल होने वाला है

ऐसा ट्रैक्टर जो लिक्विफाइड मिथेन से चलता है। यह गैस गोबर से बनती है। यानी इस तरह के ट्रैक्‍टरों में महंगा डीजल भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती है। गोबर गैस से प्राकृतिक ईंधन पर चलने वाले ये ट्रक परफॉरमेंट के लिहाज से भी दमदार हैं। ये डीजल से चलने वाले ट्रैक्‍टरों जितना ही पावरफुल हैं। आगे चलकर इससे न केवल कार्बन एमिशन को घटाने में मदद मिल सकती है

ट्रैक्‍टरों में फिट है क्रायोजेनिक टैंक
इसमें गाय-भैंसों के गोबर को ईंधन में बदला जाता है। इस ईंधन को फ्यूजिटिव मिथेन कहते हैं। इसे खेत में ही बायोमिथेन स्‍टोरेज यूनिट में रखते हैं। इन ट्रैक्‍टरों में क्रायोजेनिक टैंक फिट है। ये टैंक शून्‍य से नीचे 162 डिग्री सेंटिग्रेड पर मिथेन को लिक्विड फॉर्म में रखते हैं। इससे ट्रैक्‍टर को डीजल जितना ही पावर मिलता है। बस, उत्‍सर्जन कम होता है।

खेती की लागत घटा सकते हैं ये ट्रैक्‍टर
टेस्‍ट में पाया गया है कि ट्रैक्‍टर सिर्फ एक साल में कार्बन डाइ ऑक्‍साइड उत्‍सर्जन को 2,500 टन से घटाकर 500 टन पर ले आता है। बेनामैन के सह-संस्‍थापक क्रिस मैन कहते हैं कि ये सही मायने में दुनिया के पहले टी-7 लिक्विड-फ्यूल्‍ड ट्रैक्‍टर हैं। ये ट्रैक्‍टर कृषि क्षेत्र में क्रांति जाने की कुव्‍वत रखते हैं। इनके चलते किसानों की खेती की लागत घट सकती है। यह सर्कुलर इकोनॉमी का रास्‍ता खोलता है। कंपनी इस टेक्‍नोलॉजी को और विस्‍तार देने के बारे में भी सोच रही है। इसके जरिये ग्रामीण इलाकों में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के काम में लाया जा सकता है। भविष्‍य में बायोमिथेन के इस्‍तेमाल को अन्‍य वाहनों में भी इस्‍तेमाल करने की योजना है।

 

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