Today Haryana

सूखे और अकाल बड़ी धरती पर इस किसान ने खड़ा कर दिया 550 करोड का कारोबार, जानिए इनकी सफलता की कहानी

आज बाड़मेर की करीब 8000 हेक्टेयर जमीन पर अनार की बागवानी (Pomegranate Cultivation) के जरिए 550 करोड़ का कारोबार हुआ है

सूखे और अकाल बड़ी धरती पर इस किसान ने खड़ा कर दिया 550 करोड का कारोबार, जानिए इनकी सफलता की कहानी
X

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की लगभग 70% आबादी कृषि पर निर्भर है। भारत की अर्थव्यवस्था लगभग कृषि पर टिकी है। भारत के किसान आज भारत खाद्यान्न से लेकर बागवानी तक की फसलों का उत्पादन करते हैं। भारत में कृषि को विशेष स्थान प्राप्त है। यहां से ना सिर्फ कृषि भारत की खाद्य वस्तुओं से लेकर उद्योगों तक की जरूरतों को पूरा करता आया है। लेकिन एक समय वह भी था, बाड़मेर का वह इलाका, जब सूखा और अकाल के कारण आम जनता के साथ-साथ किसानों के सामने कई बड़ी चुनौतियां लेकर आया। राजस्थान से सटी भारत-पाकिस्तान सीमा पर अकाल के उस दौर के चर्चे आज तक होते हैं. राजस्थान का बाड़मेर जिला अकाल और सूखे से ग्रसित क्षेत्र रह चुका है।लेकिन आज इसी क्षेत्र के किसानों द्वारा इस समय में यह इलाका समृद्धि की सीढ़ियां चढ़ रहा है.

बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में बागवानी को प्रमुख तौर पर बढ़ावा मिल रहा है। इसमें प्रमुख है अनार की बागवानी। बड़े पैमाने पर होने वाली अनार की बागवानी किसानों के लिए नहीं आशा की किरण लेकर आई है।यहां की मिट्टी में उपजे अनार का दुनियाभर में निर्यात (Pomegranate Export) किया जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, बाड़मेर में लगभग 8000 हेक्टेयर जमीन पर आज अनार के बाग अपना अस्तित्व कायम किए हुए हैं. यह सब किसानों की मेहनत और लगन का नतीजा है। जिसने इस रेतीले-बंजर इलाके की तस्वीर ही बदल कर रख दी है.

बिना किसी नहर नदी या तालाब की सिंचाई के किसानों ने यह मुकाम हासिल किया है इनकी अनारो की बागवानी के अनार विश्व भर में प्रसिद्ध है। बिना किसी सिंचाई प्रबंधन के किसानों ने बड़ी मुश्किलों और कठिनाइयों का सामना करते हुए 8000 एकड़ में अनारो का बाग लगाया है। बाढ़ और सूखे से ग्रस्त रहने वाले इस क्षेत्र को अनार उत्पादन जिले का खिताब भी प्राप्त हुआ है यह सब किसानों की मेहनत और लगन का कमाल है अनारो के बंपर उत्पादन के कारण इस जिले को अनार उत्पादन में बड़ा स्थान प्राप्त है, जहां 8000 हेक्टेयर क्षेत्र में अनार की बागवानी हो रही है. इन फलों की क्वालिटी और खूबियों को देखकर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और कर्नाटक की बड़ी-बड़ी फल मंडियों के व्यापारी खुद अनार के बागों से फलों को खरीदकर ले जाते हैं. इस सफल खेती का पूरा श्रेय इस इलाके के किसानों को मिलता है। जिन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर प्रयास से इस बंजर धरती को इस फसल से लहलहा दिया है। जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों ने अपनी मेहनत के दम पर बागवानी के क्षेत्र में चमत्कार ही कर दिखाया है.

इस सफलता का श्रेय बाड़मेर के पादरू के सफल किसान रमेश कुमार को जाता है। इन्होंने 5 साल पहले गोटी और जेन्ट ईएसयू किस्म के 13000 पौधे लगाए थे. पौधे लगाने के पहले साल ही रमेश कुमार ने करीब 3 लाख रुपये के अनारों का बिजनेस किया और वहीं पौधों के अनार दूसरे साल मैं बेच कर 6 लाख रुपए की आमदनी की। दिन प्रतिदिन बढ़ती सफलता और अनारों की क्वालिटी को देख अब कई फल मंडियों के व्यापारी रमेश कुमार के बागों के अनार खरीदने के लिए उनके पास जाते हैं.

खासकर अनार की बागवानी में पादरू के साथ-साथ महिलावास, सिवाना, कानासर, बाड़मेर, मांगी, कथाड़ी, मोकलसर, बालोतरा, उंडू, भियाड़, मोखाब जैसे जिलों के ज्यादातर किसानों ने अनार की बागवानी के जरिए समृद्धि हासिल की हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज बाड़मेर की करीब 8000 हेक्टेयर जमीन पर अनार की बागवानी (Pomegranate Cultivation) के जरिए 550 करोड़ का कारोबार हुआ है. इससे बाड़मेर राजस्थान (Barmer, Rajasthan) के किसानों को आर्थिक मजबूती तो मिली ही है, साथ ही बागवानी फसलों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है. इन्हीं किसानों से प्रेरित होकर देशभर के किसान विपरीत परिस्थितियों में बागवानी फसलों की खेती (Horticulture Crops) करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं.

Next Story
Share it