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जड़ गलन रोग से चौपट हो रही सरसों की फसल, पहली सिंचाई के बाद पौधे मुरझाकर सूख रहे

सरसों की फसल में जड़ गलन रोग:पहला पानी लगने के बाद हो रही खराब, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

जड़ गलन रोग से चौपट हो रही सरसों की फसल, पहली सिंचाई के बाद पौधे मुरझाकर सूख रहे
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अनूपगढ़ क्षेत्र में सरसों की फसल में जड़ गलन रोग देखा जा रहा है। इस रोग के प्रभाव से सरसों की फसल में पहला पानी लगाने के बाद फसल खराब हो रही है। सहायक निदेशक कृषि विस्तार रामनिवास चौधरी ने बताया कि क्षेत्र के किसानों ने सरसों की फसल में आ रहे इस रोग के संबंध में कृषि पर्यवेक्षकों को अवगत करवाया गया। जिसके बाद कई क्षेत्रों में जाकर मौका मुआयना भी किया गया।

उन्होंने बताया कि सरसों की फसल में पहला पानी लगाने के बाद सरसों की फसल में बैक्टीरिया और फंगस की मात्रा बढ़ रही है, जिससे यह रोग बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में यह समस्या आ रही है, वहां खेतों में जाकर निरीक्षण किया गया। वहां पर फसलों की स्थिति को देखा तो तब पाया कि सरसों की फसल पानी लगाने के बाद फंगस के कारण सरसों के पौधे की जड़े गल रही हैं तथा पत्तियां सूख रहे हैं। खासकर यह रोग पक्की जमीन पर की गई, सरसों की बिजान के पौधों पर हो रहा है। इसके निदान के लिए वहां मौके से बीमार पौधे में मिट्टी के नमूने को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है।

कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

उन्होंने बताया की रोग पर काबू पाने के लिए कृषि विभाग की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है। इस समस्या के समाधान के लिए फसल में ड्रेंचिंग करानी आवश्यक है। ड्रेंचिग के लिए 15 ग्राम स्ट्रेपटोसाइकलिन के साथ ढाई सौ ग्राम कार्बेंडाजिम, 12 प्रतिशत प्लस मेनकोजॉब 63 प्रतिशत के मिश्रण को 100 लीटर पानी में घोलकर ड्रेंचिंग करें। ट्रेनिंग गीले खेतों में ही करना चाहिए तथा यूरिया का कम मात्रा में सिंचाई के साथ प्रयोग करें।

उन्होंने बताया कि यूरिया के अधिक प्रयोग से भी इस तरह के रोग हो जाते है। सहायक निदेशक चौधरी ने बताया कि यूरिया के अधिक प्रयोग के अलावा पानी के ज्यादा भरकर लगाने वाले स्थानों पर इस तरह का रोग देखा गया है। उन्होंने किसानों को सरसों की फसल को रोग से बचाने की सलाह देते हुए बताया कि क्यारी में पूरा भरकर पानी नहीं लगाएं और यूरिया का कृषि पर्यवेक्षक के दिए गए सलाह के अनुसार ही प्रयोग करें। वहीं पहला पानी लगाने में ज्यादा देरी नही करें।


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