मुआवजा राशि को लेकर किसानों का लघु सचिवालय में पड़ाव जारी

प्रशासन पर लगाया भेदभाव का आरोप
सिरसा। नरमा-कपास की फसल में दो वर्ष पूर्व हुए सफेद मक्खी के हमले से खराब हुई फसल की बकाया 192 करोड़ की मुआवजा राशि जारी करने सहित दर्जनों मांगों को लेकर किसानों द्वारा लघु सचिवालय में ट्रेक्टर-ट्रालियों के साथ पड़ाव दूसरे दिन भी जारी रहा। जिलेभर के सैकड़ों गांवों के किसान बड़ी संख्या में भारतीय किसान एकता बीकेई के नेतृत्व में पहुंचकर पक्का मोर्चा जमाकर बैठे हंै। बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि अभी तक कोई भी अधिकारी किसानों से बातचीत के लिए नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दिवस प्रशासन को लिखित रूप में धरनास्थल पर बिजली व एंबुलेंस के लिए अवगत करवाया गया था, क्योंकि ठंड का मौसम है और धरने पर काफी संख्या में बुजुर्ग किसान बैठे हंै, जिनकी तबियत बिगडऩे पर उन्हें तुरंत उपचार में समस्या आ सकती है, लेकिन प्रशासन से किसानों की बात सुनने की बजाय बाथरूमों पर ताले लगा दिए और एंबुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं की, जिससे किसानों में प्रशासन के प्रति खासा रोष है।


भारतीय किसान एकता (बीकेई) अध्यक्ष लखविंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की दोगली नीतियोंं से प्रदेश का किसान बेहद परेशान है। खरीफ  फसल-2020 की गिरदावरी के समय राजस्व विभाग ने नरमे-कपास के फसली नुकसान को चार स्लैबों में आबंटित किया था, जिसमें जीरो से 33 प्रतिशत फसल खराबे का शून्य मुआवजा, 34 से 50 प्रतिशत खराबे का 7 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा, 51 से 75 प्रतिशत का प्रति एकड़ 9500 रुपए और 76 से 100 प्रतिशत खराबे का प्रति एकड़ 12000 रुपए मुआवजा देने का सरकारी ऐलान हुआ था। लेकिन मुआवजा राशि जारी करते हुए समय प्रदेश सरकार ने 34 से 50 प्रतिशत की सलैब ही खत्म कर दी गई। जिससे हजारों किसानों को मुआवजे से वंचित होना पड़ा है। लखविंद्र सिंह औलख का कहना है कि सरकार जान बूझकर किसानों के साथ-साथ आमजन को भी परेशान कर रही है। किसान जब नहरी विभाग में खस्ताहाल खाल की मरम्मत का विषय लेकर पहुंचता है तो उसे 20 साल की समयावधि बताकर वापस भेज दिया जाता है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगा रही है। वहीं बिजली निगम किसानों को बेवजह परेशान कर रहा है। ई-बिल के नाम पर 6-6 महीनों तक बिल जारी नहीं किए जाते, जिससे खेतीहर किसानों को एक साथ राशि भरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस मौके पर किसान नेत प्रकाश ममेरा, जगदीश स्वामी, सुभाष बचेर, इकबाल सिंह, गुरविंद्र सिंह, नवदीप सिंह, हंसराज पचार, सुनील नैन, प्रदीप कासनियां सहित काफी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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