पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियों का किया विकेंद्रीकरण – मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर उन्हें और अधिक स्वायत्ता प्रदान करते हुए घोषणा की कि अब से पंचायती राज संस्थाओं की अपनी आय में से होने वाले 2 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति चुने हुए जन प्रतिनिधियों द्वारा उनके स्तर पर ही दी जाएगी। सरपंच, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के चेयरमैन द्वारा यह स्वीकृति प्रदान की जाएगी। 2 लाख रुपये तक के कार्यों की तकनीकि स्वीकृति जूनियर इंजीनियर देगा और इन कार्यों के लिए किसी प्रकार का कोई टेंडर नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने आज यहां प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 2 लाख से 25 लाख रुपये तक के कार्यों की तकनीकि स्वीकृति एसडीओ देगा। इन कार्यों के लिए हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल के माध्यम से अल्पावधि के टेंडर किये जाएंगे। 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों की तकनीकि स्वीकृति एक्सईएन देगा। एक करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये तक के कार्यों की तकनीकि स्वीकृति अधीक्षक अभियंता तथा 2.5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य की तकनीकी स्वीकृति चीफ इंजीनियर देगा।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की फिक्स्ड डिपोजिट भी होती है। गांवों में विकास कार्यों के लिए यदि धन की आवश्यकता होती है तो इस डिपोजिट में से एक साल में 50 लाख रुपये तक या कुल डिपोजिट की 10 प्रतिशत राशि, जो भी अधिक हो, जिला उपायुक्त रिलीज कर सकता है। इससे अधिक राशि के लिए जिला उपायुक्त इस विषय को राज्य सरकार को भेजेंगे।

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उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए यदि राशि कम पड़ती है और पंचायती राज संस्थाओं की मांग पर राज्य सरकार अतिरिक्त बजट प्रदान करती है, तो 25 लाख रुपये से कम काम के लिए राशि सीधे उन्हें दे दी जाएगी। 25 लाख रुपये से ज्यादा के काम ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किये जाएंगे। इसके लिए 25 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक की प्रशासनिक स्वीकृति विभाग के निदेशक द्वारा दी जाएगी और इस कार्य की तकनीकि स्वीकृति एक्सईएन देगा। एक करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये तक प्रशासनिक स्वीकृति प्रशासनिक सचिव तथा तकनीकि स्वीकृति अधीक्षक अभियंता देगा। 2.5 से 10 करोड़ रुपये तक के कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति संबंधित मंत्री तथा तकनीकि स्वीकृति चीफ इंजीनियर देगा। दस करोड़ रुपये से अधिक के कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर पर होगी तथा तकनीकि स्वीकृति चीफ इंजीनियर द्वारा दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि पहले कार्य करवाने के लिए तकनीकी स्वीकृतियों में ही बहुत लंबा समय लगता था, लेकिन अब उनके स्तर पर स्वीकृतियां होने से यह कार्य जल्दी होंगे और कार्यों में पारदर्शिता भी आएगी।

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श्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार अपने राजस्व से गांवों व शहरों में आबादी के अनुसार विकास कार्यों के लिए 7 प्रतिशत धनराशि आवंटित करती है। 2 प्रतिशत राशि रिजर्व में रखी जाती है, ताकि वित्तीय रूप से कमजोर पंचायती राज संस्थाओं व नगर निकायों को अतिरिक्त फंड मुहैया करवाया जा सके।

इस मौके पर मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ अमित अग्रवाल एवं विभाग के अतिरिक्त निदेशक श्री विवेक कालिया भी उपस्थित थे

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