हरियाणा में दान में मिली जमीन पर काबिज रहेंगे किसान और ब्राह्मण, बन रहा रहा ये नया कानून

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में कमेटी गठित अभी तक हो चुकीं दो बैठकें
Today Haryana। Chnadigarh

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार दान में दी गई जमीनों पर काबिज लोगों से जमीन का कब्जा नहीं छुड़वाएगी ऐसी जमीनों का मालिकाना हक कब्जाधारी किसानों का ही रहेगा। लेकिन सरकार ऐस बंदोबस्त करने जा रही है, ताकि इन जमीनों पर कोई नया कब्जा न हो सके। प्रदेश सरकार ने जुमला मालकान, मुश्तरका मालकान, शामलात देह, जुमला मुश्तरका मालकान, आबादकार, पट्टेदार, दौलीदार, लुटमीदार, मुकरीरदार और अन्य काश्तकारों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के मामले में कानून बनाने का निर्णय लिया है। इस कमेटी के चेयरमैन मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं हैं।

हरियाणा में दान में मिली जमीन पर काबिज रहेंगे किसान और ब्राह्मण, बन रहा रहा ये नया कानून

हरियाणा सरकार के इस फैसले से उन लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है, जिन पर कब्जे की जमीन छुड़वाने का दबाव था। यह जमीन पूर्व में किसानों व ब्राह्मणों को दान में मिली है। असलियत में इस जमीन की मलकीयत पंचायतों की है, लेकिन कब्जा संबंधित किसानों व ब्राह्मणों का हैं, जिन्हें दन में यह जमीन मिल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसी जमीनों से कब्जा छुड़वाने की दिशा में सरकार ने प्रयास किए, लेकिन कई प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राहत देने की मांग की है।

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बुधवार को भारतीय किसान यूनियन प्रतिनिधिमंडल का मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिला और इन जमीनों का मालिकाना हक देने की मांग की, ताकि भविष्य में कोई भी कब्जाधारकों को जमीन का कब्जा छोड़ने के लिए तंग न कर सके।

जुमला मालकान, मुश्तरका मालकान जुमला मुश्तरका मालकान, शामलात देह आवादकार, पट्टेदार, ढोलीदार, वुटमीवर व मुकरीरवरों को मिलेगा कानून का फायद

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विधानसभा में लाया जाएगा विधेयकः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कानून बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। जल्दी ही विधेयक विधानसभा में लाया जाएगा। किसान यूनियन के प्रतिनिधि वकील भी कमेटी को कानून बनाने से संबंधित यदि कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो वे दे सकते हैं। बैठक में कृषि मंत्री जेपी दलाल शामिल हुए, जबकि अवकाश पर चल रहे सीएम के प्रधान सचिव वी उमाशंकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े। बैठक में कई विभागीय अधिकारियों समेत भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि सुरेश कौथ, अमरजीत सिंह मोहड़ी, मनदीप सिंह नाथवान मौजूद रहे।

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खेतों में जाने का रास्ता मिलेगा, सड़क किनारे जमीन की होगी चकबंदी

सरकार राज्य में सड़कों के दोनों तरफ की जमीन की वेबारा से चकबंदी कराएगी। प्रदेश के किसानों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को जानकारी दी कि हाईवे या एक्स्प्रेस वे के निर्माण के लिए जमीन के अधिग्रहण के कारण खेतों में जाने के रास्ते की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। किसानों की जमीन सड़क के दोनों तरफ आ गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों की समस्या को समझते हुए घोषणा की है कि राज्य सरकार सड़कों के दोनों तरफ की जमीन की पुनः चकबंदी करने का प्रबंध करेगी, ताकि किसी किसान की जमीन यदि सड़क के दोनों तरफ आ गई है तो उसे सड़क के एक तरफ जमीन मिल जाए। चकबंदी के उपरांत किसानों को चार से पांच करम का रास्ता प्रदान करने की व्यवस्था की जा सकेगी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने खेतों में जाने के रास्ते का बंदोबस्त करने का अनुरोध किया था। विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पानी की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। वर्तमान में उपलब्ध पानी का उपयुक्त प्रबंधन करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

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नया कब्जा नहीं होने देगी सरकार

मुख्यमंत्री ने भाकियू प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में कहा कि जो किसान वर्षों से ऐसी जमीनों पर मकान बना कर रह रहे है या खेती कर रहे है. उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा। उनसे जमीन नहीं छुड़वाई जाएगी। लेकिन सरकार ने सख्ती की है, ताकि इस प्रकार का कोई नया कब्जा न हो सके। मनोहर लाल ने जानकारी दी कि पुराने कानूनों का अध्ययन करने व नया कानून तैयार करने के लिए विशेष कमेटी गठित की जा चुकी है। इस कमेटी में उनके अलावा उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली, शहरी निकाय मंत्री डा. कमल गुप्ता तथा महाअधिवक्ता बलदेव राज महाजन शामिल हैं। कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं और अधिकारियों को कानून का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

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हर गांव में भू-जल स्तर के बारे में मिलेगी जानकारी

मनोहर लाल ने किसानों से कहा कि पानी की बचत के लिए वे सूक्ष्म सिचाई परियोजनाओं को अपनाएं। इस प्रणाली को अपनाने पर सरकार 85 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करेगी। जल संसाधन प्राधिकरण हर गांव के जल स्तर का आकलन कर रहा है। अब खंड अनुसार नहीं, गांव के अनुसार भू-जल स्तर का पता लगेगा, ताकि पानी की कमी पर वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।

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सरकार खरीद चुकी 900 एकड़ जमीन

भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में सरकारी परियोजनाओं के लिए एक इंच भूमि का भी अधिग्रहण नहीं किया गया है। परियोजनाओं के लिए भूमि मालिकों की सहमति पर उनके रेट के अनुसार सरकार उनकी जमीन खरीद रही है। भू-मालिकों की आपसी सहमति से लगभग 900 | एकड़ भूमि सरकार खरीद चुकी है।

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