Amrit Mahal Cow: डबल प्रॉफिट देती है इस नस्ल की गाय, जानिये कैसे करें पहचान और विशेषताएं

Rakesh Gusaiana
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Amrit Mahal Cow Dairy Farming: भारत में, देसी नस्ल की गायों का डेयरी उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। देश में लगभग 50 प्रकार की देसी गायें हैं, और प्रत्येक गाय की अपनी विशेषताएं होती हैं।

इनमें से एक विशेष नस्ल है जो “अमृत महल गाय” के नाम से भी प्रसिद्ध है, जिन्हें “बेथ चावड़ी” के नाम से भी जाना जाता है। “अमृत” का अर्थ होता है दूध और “महल” का अर्थ होता है घर; इस नस्ल का विकास दक्षिणी भारत की भारवाहक गायों से किया गया है ताकि दूध उत्पादन में वृद्धि हो सके।

वहीं, इस नस्ल के मवेशी ज्यादातर कर्नाटक के चिकमंगलूर, चित्रदुर्ग, हासन, शिमोगा, तुमकुर और दावणगेरे आदि में पाए जाते हैं।

अमृत महल गाय का माथा उभरा हुआ होता है. इनका शरीर बेहद सुडौल होता है और कमर के ऊपर की ओर का हिस्सा ऊंट की तरह उठा हुआ होता है। अगर इनके सींग की बात करें तो वे बेहद नोकिले और पीछे की तरफ बिल्कुल सीधे होते हैं।

वहीं कान बाहर की ओर सीधे होते हैं। अमृत महल नस्ल की गायें ज्यादातर सफेद-काले और स्लेटी रंग की होती हैं।

वहीं कुछ मवेशियों के चेहरे पर सफेद भूरे निशान मौजूद होते हैं. ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं अमृत महल गाय की पहचान और विशेषताएं-

अमृत महल की विशेषताएं और पहचान:

ऊँचाई: अमृत महल गाय की ऊँचाई लगभग 126 सेंटीमीटर होती है, जबकि बैलों की ऊँचाई लगभग 132 सेंटीमीटर होती है।
शरीर की लंबाई: इन गायों की शरीर की लंबाई 133 सेंटीमीटर होती है, बैलों के शरीर की लंबाई करीब 134 सेंटीमीटर की होती है।
वजन: प्रौढ़ अमृत महल गाय का वजन लगभग 300-350 किलोग्राम होता है, जबकि बैलों का वजन लगभग 500 किलोग्राम के करीब होता है।
ब्यान्त की आयु: अमृत महल नस्ल की गायें लगभग 50 महीने की आयु में पहली बार ब्यान्त देती हैं।
ब्यान्तों के अंतर: एक ब्यान्त से दूसरे ब्यान्त के बीच लगभग 15 माह का अंतर होता है।
दूध का उत्पादन: अमृत महल नस्ल की गायें एक ब्यान्त में लगभग 550-600 लीटर दूध देती हैं।
रंग: इनकी बालों की रंगत सफेद, काले और स्लेटी होती है।
कान: इनके कान बाहर की ओर सीधे होते हैं।
चेहरे पर निशान: कुछ मवेशियों के चेहरे पर सफेद भूरे निशान हो सकते हैं।
शरीर की सुडौलता: अमृत महल गाय की शारीरिक सुडौलता उचित होती है जो उन्हें दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण बनाती है।

गायों को होने वाले रोग और बीमारियां

अमृत महल गायों की बीमारियाँ और सेहत की देखभाल:

अमृत महल गायों को विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे कि पाचन प्रणाली संबंधित बीमारियाँ जैसे सादी बदहजमी, तेजाबी बदहजमी, खारी बदहजमी, कब्ज, अफारे, मोक/मरोड/खूनी दस्त, और पीलिया आदि हो सकती हैं। साथ ही, इनमें तिल्ली का रोग (एंथ्रैक्स), एनाप्लाजमोसिस, अनीमिया, मुंह खुर रोग, मैगनीशियम की कमी, सिक्के का जहर, रिंडरपैस्ट (शीतला माता), ब्लैक क्वार्टर, निमोनिया, डायरिया, थनैला रोग, पैरों का गलना, और दाद आदि शामिल हो सकती हैं।

गाय पालन के दौरान ध्यान देने योग्य बातें:

• प्रसव और बच्चों की देखभाल: गाभिन पशुओं की अच्छे से देखभाल करें, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हो और अच्छे बछड़े जन्मे।
• टीकाकरण: गायों को सिफारिश के अनुसार टीके दिलवाने का ध्यान दें, जो उनकी सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
• आवास की व्यवस्था: गायों के लिए उचित आवास की व्यवस्था करें, ताकि उनका रहने स्थान सुरक्षित और स्वस्थ्यपूर्ण हो।

गाय पालन के दौरान यह सभी बातें ध्यान में रखने से आपकी गायों की सेहत और उत्पादन दोनों में सुधार हो सकता है।

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