किसानों के लिए बाजार में आई नैनो यूरिया, ऐसे करें इस्तेमाल,नैनो यूरिया के फ़ायदे

Mukesh Gusaiana
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डीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने जिलाभर के किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी फसलों में दानेदार यूरिया की जगह नैनो तरल यूरिया का प्रयोग करें और फसलों की पैदावार बढ़ाएं। नैनो तरल यूरिया आधा लीटर की शीशी में खाद की एक बोरी यूरिया से कहीं ज्यादा असरदार है।

विशेषज्ञों के मुताबिक नैनो तरल यूरिया से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है बल्कि फसल की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। नैनो तरल यूरिया, दानेदार यूरिया से सस्ती भी है। नैनो तरल यूरिया उपज की गुणवत्ता बढ़ाने का एक साधन है। साथ ही इससे खेती की लागत में भी कमी आती है।

फसलों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए किसान यूरिया का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अभी तक यूरिया सफेद दानों के रूप में उपलब्ध थी जिसका इस्तेमाल करने पर आधे से भी कम हिस्सा पौधों को मिलता था बाकी जमीन और हवा में चला जाता था।

डीसी ने बताया कि भारत नैनो तरल यूरिया को लांच करने वाला पहला देश है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड इफको ने इसे लॉन्च किया था। इफको के मुताबिक धान, आलू, गन्ना, गेहूं और सब्जियों समेत सभी फसलों में इसके बेहद अच्छे परिणाम मिले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तरल यूरिया के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा है कि धान, गेहूं, तिलहन और सब्जियां जो भी उगाई जाती हैं उनकी क्वालिटी बढ़ती है। आधा लीटर यूरिया की शीशी पूरे एक एकड़ खेत के लिए काफी है। साथ में इसका प्रयोग करने से पर्यावरण, जल और मिट्टी में जो प्रदूषण हो रहा है वो नहीं होगा। नैनो तरल यूरिया का उपयोग हम फसल की पत्तियों पर छिडक़ाव के माध्यम से करते हैं। छिडक़ाव के लिए एक लीटर पानी में 2 से 4 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाना होता है। यानि जो 15 लीटर की टंकी होती है फसल की जरुरत के अनुसार 30 से 60 मिलीलीटर मिलाना होता है।

डीसी ने बताया कि एक फसल में दो बार नैनो यूरिया का छिडक़ाव करना चाहिए। वैज्ञानिकों के मुताबिक नैनो तरल यूरिया के कणों का साइज इतना कम है कि ये पत्ती से सीधे पौधे में प्रवेश कर जाता है।

वैज्ञानिक बताते हैं जब हम पत्तियों पर इसका छिडक़ाव करते हैं तो सारा का सारा नाइट्रोजन पत्तियों को स्टोमेटा और फ्लोएम है उससे इसकी साइज बहुत छोटी रहती है तो जिससे सीधे ये पत्तियों में प्रवेश हो जाता है। और पौधे की जरुरत के अनुसार नाइट्रोजन को रिलीज करता है। जबकि दानेदार यूरिया का नाइट्रोजन सिर्फ एक हफ्ते तक काम में आता है।

उन्होंने फसल उपज को बढ़ाने के साथ साथ पर्यावरण व कृषि भूमि के मृदा स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए किसानों से नैनो यूरिया का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

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मुकेश गुसाईंना (Mukesh Gusaiana) किसान केसरी में सीनियर एडिटर और इसके सस्थापक हैं. डिजिटल मीडिया में 9 साल से काम कर रहे हैं. इससे पहले जनता टाइम पर अपनी सेवाएं दे रहे थे, इन्होने अपने करियर की शुरूआत चौपाल टीवी में कंटेंट राइटिंग से की और पिछले कई सालों से लगातार ऊँचाइयों को छूते जा रहे हैं ।
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